बाथरूम और टॉयलेट

बाथरूम और टॉयलेट बनाते समय ध्यान रखें यह बातें

वास्तु हमारी जिंदगी से जुड़ी हर एक चीज को प्रभावित करता है। सुबह उठने से लेकर शाम सोने तक दिन में होने वाली क्रियाओं में भी वास्तु का अहम स्थान रहता है। घर में बाथरूम और टॉयलेट सबसे उपेक्षित स्थान माना जाता है और इसकी ज्यादा कोई प्रवाह भी नहीं करता, क्योंकि इंसान की फितरत है जो चीज सबसे ज्यादा काम की हो वो उसी का ही ध्यान रखता है।

लेकिन ध्यान दे बाथरूम और टॉयलेट भले ही घर में उपेक्षित स्थान हो सकते है लेकिन इनके लिए स्थान का चुनाव करते समय बहुत ध्यान रखने की जरूरत है। अगर इनमे भी वास्तु का ध्यान नहीं रखा गया तो घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश कर जाएगी जिस खामियाजा घर के सदस्यों को भुगतना पड़ेगा।
आईये जानते है बाथरूम और टॉयलेट से जुड़े वास्तु के बारे में।



वास्तु के अनुसार बाथरूम और टॉयलेट किस दिशा में होना चाहिए?

वस्तीशास्त्र के अनुसार घर में बाथरूम और टॉयलेट का निर्माण पश्चिम, दक्षिण, उतर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए। यह दिशाएँ बाथरूम और टॉयलेट के लिए वास्तु के हिसाब से शुभ मानी जाती है और इन दिशाओं का ध्यान रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती है।
अगर बाथरूम को गलत दिशा में बना दिया तो यह घर के सदस्यों के स्वास्थ्य और वितीय समस्याओं के लिए चुनोती भरा हो सकता है।

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वास्तु के अनुसार बाथरूम और टॉयलेट एक साथ होना क्यों खतरनाक है?

ध्यान रहे कभी भी साथ में बनाये (Attached Toilet) गए बाथरूम और टॉयलेट दक्षिण-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम कोने में नहीं होना चाहिए। अगर इस दिशा में इस तरह के बाथरूम बनाये गए है तो इससे घर के महिला सदस्यों का स्वास्थ्य खराब रहता है। शौचालय के अंदर शोचघर पूर्व दिशा में कभी भी नहीं होना चाहिए।







वास्तु के अनुसार बाथरूम और टॉयलेट से जुडी कुछ ख़ास बातें

  • बाथरूम और टॉयलेट भूमि से 1-2 फीट उपर होने चाहिए।
  • इसका दरवाजा पूर्व या उतर की दीवार पर होना चाहिए।
  • बाथटब, नल और शावर उतर-पूर्व दिशा में होना वास्तु के हिसाब से शुभ माना जाता है।
  • आईना उतर-पूर्व दिशा में लगाया जा सकता है।
  • बाथरूम में गीजर और अन्य इलेक्ट्रनिक उपकरण जैसे हीटर, स्विचबोर्ड आदि दक्षिण-पूर्व कोने में स्थापित करें, ऐसा वास्तु के हिसाब से अच्छा माना जाता है।
  • टॉयलेट में पूर्व, पशिचम या उतर की दिशा में एक छोटी सी हवादार खिड़की होनी चाहिए। ध्यान रहे टॉयलेट में खिड़की दक्षिण दिशा में ना हो अन्यथा स्वास्थ्य खराब रह सकता है।
  • इसके के लिए हल्के रंग जैसे सफ़ेद, आसमानी, हल्का नीला जैसे रंगो को प्राथमिकता दे। काले और लाल रंग को कभी भी बाथरूम और टॉयलेट में प्रयोग ना करें।
  • बाथरूम और टॉयलेट में कभी भी डार्क रंगो का प्रयोग नहीं करें, क्योंकि डार्क रंगो में कभी भी कीड़ों और खतरनाक जानवरों को अच्छे से देखा नही नहीं जा सकता है।
  • वास्तु के हिसाब से बाथरूम में बाल्टी का रंग नीला होना शुभ माना जाता है क्योंकि नीला रंग ख़ुशी और भाग्य का प्रतीक है।
  • ध्यान रखें बाल्टी में हमेशा साफ़ और स्वच्छ पानी रखें।
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