वास्तु शास्त्र में दिशाओं का महत्व

वास्तु शास्त्र में दिशाओं का महत्व

ज्योतिष शास्त्र में वास्तु का बहुत महत्व है और घर से लेकर व्यापार तक में लोग आजकल वास्तु का पूरा ध्यान रखते है। वास्तु में सबसे ज्यादा ध्यान दिशाओं का रखा जाता है क्योंकि गलत दिशा में कुछ भी रखने से उसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। आईये जानते है वास्तु शास्त्र में दिशाओं का क्या महत्व है?



वास्तु शास्त्र में दिशाओं का महत्व

पूर्व दिशा (East Direction)

यह दिशा सूर्योदय की दिशा है जो अग्नि को प्रभावित करती है। अगर इस दिशा को बंद कर दिया तो घर में सूर्य की किरणों का का आना बाधित हो जायेगा। इस वजह से मान-सम्मान में कमी आती है और कर्ज बढ़ता है।
यह दिशा पितृ स्थान को बताती है इसलिए इस दिशा कमो बाधित करने से पितृ दोष भी लगता है जिस वजह से हमें हमारे पितरों का आशीर्वाद नहीं मिल पाता है। घर के मांगलिक कार्यों में बाधाएं आने लगती है और घर के निर्माण के 5-6 साल के बीच ही घर के मुखिया का निधन हो जाता है। ऐसे में इस दिशा का ध्यान रखना बहुत जरुरी है।



पश्चिम दिशा (West Direction)

यह दिशा वायु को प्रभावित करती है और इस दिशा के स्वामी वायु देवता है। अगर घर का मुख्य दरवाजा पश्चिम दिशा की और खुलता है तो उस घर में रहने वाले लोगों का मन चंचल रहता है। उन्हें किसी कार्य में सफलता नहीं मिलती और बच्चे की शिक्षा में भी बाधा आने लगती है।
पैसा पास में नहीं टिकता है, जितना भी आता है खत्म हो जाता है। इसी तरह अगर दूकान का दरवाजा भी पश्चिम दिशा की और है तो वहां माँ लक्ष्मी नहीं रूकती।
इसलिए जिंदगी में सफल होना चाहते है और बहुत अधिक पैसा कमाने चाहते है तो इस दिशा का विशेष ध्यान रखें।

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उतर दिशा (North Direction)

इस दिशा में जल-तत्व को स्थान दिया गया है इसलिए इस दिशा में खाली स्थान होना चाहिए। यह दिशा भगवान कुबेर की है जो की धन के देवता है। यह दिशा सफलता, उन्नति, धन-धान्य और सभी तरह के सुख देने वाली दिशा है।
अगर आपके घर के दरवाजे उतर दिशा में है तो भगवान कुबेर की सीधी दृष्टि आप पर पड़ती है और घर में कभी भी पैसे की तंगी नहीं आती। इसके अलावा यह दिशा स्थिरता की सूचक है।

ईशान कोण (Northeast Direction)

इस दिशा को वास्तु में सबसे ख़ास स्थान दिया गया है। यह दिशा हमें बुद्धि, ज्ञान, धैर्य, विवेक और साहस प्रदान करती है। अगर गलती से भी इस दिशा को दूषित कर दिया तो कई तरह के कष्ट जिंदगी में आने लग जाते है।
व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है और घर में कलह का माहौल बना रहता है।

दक्षिण दिशा (South Direction)

दक्षिण दिशा को पृथ्वी की दिशा माना जाता है और इसके अलावा सबसे ख़ास बात यह है की यह मृत्यु के देवता यमराज की दिशा है। यह दिशा सभी तरह की बुराइयों का नाश करती है और व्यक्ति में धैर्य को बढ़ाती है। यह दिशा रोग भी बढ़ाती है और दुश्मन का भी पैदा करती है।
हमेशा ध्यान में रहे की इस दिशा को बंद करना ही बेहतर है अन्यथा इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

आग्नेय कोण (Southeast Direction)

दक्षिण-पूर्व की दिशा आग्नेय कोण कहलाती है और यह अग्नि देवता की दिशा अहै। इस दिशा में रसोईघर होना सही रहता है क्योंकि आग से संबधित काम वहीं पर ही होते है। इस बात का विशेष ध्यान रखें की अग्नि देवता की दिशा होने के कारण यहाँ पर पानी से संबधित चीजें ना रखें क्योंकि आग और पानी एक-दुसरे के दुश्मन है। आग्नेय कोण में खाना-खाना भी अशुभ होता है।

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वायव्य कोण (Northwest Direction)

यह दिशा वायु को प्रभावित करती है इसलिए इस दिशा में खिड़की और रोशनदान होना शुभ रहता है। यहाँ से ताज़ी हवा घर में प्रवेश करती है जिससे स्वास्थ्य सही रहता है। इससे रिश्तों में भी प्यार बढ़ता है और तनाव खत्म होता है।
इस स्थान पर मेहमानों के रहने की व्यवस्था की जा सकती है और दुसरे फ्लोर पर जाने की सीढियां बनाई जा सकती है।

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