राहु को शांत करने के उपाय

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राहू को केतु की तरह ही एक छाया ग्रह माना जाता है। इनके विषय में एक पौराणिक कथा है कि समुद्र मंथन के समय एक राक्षस ने धोखे से अमृत पान कर लिया। भगवान विष्णु ने उसे अमृत पान करते हुए देखा और उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। राक्षस का धड़ केतु सर राहु कहलाया। राहु और केतु दोनों ही छाया ग्रह कहलाते हैं। ज्योतिष के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु अशुभ परिणाम देता है तो उसे अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। उसकी जिंदगी में दुख, चिंता और डर हमेशा बना रहता है। उसके विवाह में भी विघ्न होता है और शादी देर से होती है।

राहु के दुष्प्रभाव

जिस व्यक्ति की कुंडली में राहु नीच का होता है, उस व्यक्ति में राहु ग्रह के दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं वह व्यक्ति आलसी होता है। उसे पाप कर्म करने में सुख की अनुभूति होती है। उसे पेट संबंधी बीमारियां, नींद आने की समस्या और मानसिक चिंताएं हमेशा लगी रहती है। उस व्यक्ति को कई बीमारियां होने लगती हैं। उसके बनते काम बिगड़ने लगते हैं। राहु के खराब होने के कारण जीवन में कई परेशानियां आने लगती है। उस व्यक्ति को आर्थिक नुकसान होने लगता है। वह बहुत जल्दी गुस्सा करता है। वह अपने ऊपर नियंत्रण शीघ्रता से खो देता है।

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नीच का राहु के उपाय

जिनका राहु खराब होता है वह हमेशा असमंजस की स्थिति मैं रहते हैं उन्है दूसरों पर और स्वयं पर भी विश्वास ही नहीं होता। वह दूसरों से बिना वजह लड़ाई झगड़ा करते रहते हैं। दूसरों को भला भला बुरा कहते हैं। जिन लोगों की कुंडली में राहु नीच का होता है उनका चरित्र बिगड़ जाता है और उनकी अवैध संबंध भी हो जाते हैं। उनकी कुंडली में दुर्घटनाओं के योग रहते हैं। लोगों के खिलाफ षड्यंत्र रचना उनके साथ विश्वासघात करना और लोगों से दुश्मनी रखना यह सब भी आपकी कुंडली में राहु नीच का होने के कारण होता है।

खराब राहु के लक्षण

जब आपकी राशि में राहु नीच की स्थिति में होता है तो धन की हानि होने लगती है। यदि किसी व्यक्ति के हाथ के नाखून अपने आप ही टूटने लगे तो यह दर्शाता है की कुंडली में राहु खराब स्थिति में होगा। व्यक्तियों के दूसरों से संबंध खराब होने लगते हैं। मस्तिष्क की बीमारियां, त्वचा संबंधी रोग, कैंसर, गठिया व हड्डियों से संबंधित बीमारियां, फैक्चर , हृदय रोग आदि होने लगते हैं। उसकी नींद टूटने लगती है। व्यक्ति नशे की लत का शिकार होने लगता है। घर की सीढ़ियों का गलत दिशा में बनना, दहलीज़ का दबना, टूटा फूटा होना भी राहु दोष पैदा करता है। घर में बाथरूम, टॉयलेट गंदा या टूटा फूटा है तो ये भी राहु दोष को इंगित करता है। किसी व्यक्ति का बार बार बीमार होना, कांच की चीजों का टूटना, पत्थरों का टूटना, घर की चीजों का टूटना आदि खराब राहु के संकेत हैं। नित नई घटनाओं का शिकार होना भी खराब राहु का संकेत है।

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राहु को मजबूत करने के उपाय

अगर आपकी कुंडली में राहु नीच का है तो फिर आपको राहु मंत्र ओम रां राहवे नमः का जाप करना चाहिए। भगवान विष्णु और भगवान शंकर दोनों राहु को मजबूत करते हैं। भगवान शंकर की सोमवार के दिन और भगवान विष्णु की बृहस्पतिवार के दिन पूजा करनी चाहिए। सोमवार और शनिवार के दिन पानी में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाने चाहिए। इन सभी उपायों से राहु मजबूत होता है। आपको जल में कुशा डालकर उस जल से स्नान करना चाहिए। आपको शनिवार के दिन मीठी चीजें नहीं खानी चाहिए। नियमित रूप से भगवान विष्णु का विष्णु सहस्रनाम का जाप करना चाहिए। भगवान शंकर के ओम नमः शिवाय, व महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए। इन सभी उपायों से राहु शांत होते हैं।

कालसर्प दोष दूर करने के उपाय

जब आपकी कुंडली में सारे ग्रह राहु केतु के मध्य में  एक तरफ हो जाते हैं, तो कालसर्प दोष होता है। इस कालसर्प दोष के कारण विवाह में देरी होती है और विवाह में विघ्न आते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको चांदी के दो सांप दान करने की सलाह दी जाती है। राहु दोष से मुक्ति पाने के लिए आपको अट्ठारह शनिवार तक राहु का व्रत रखना चाहिए। आपको शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में कुशा, दुर्वा और जल चढाना चाहिए। शनिवार के दिन भोजन काले तिल से बनी वस्तुओं का करना चाहिए। शनिवार की रात को पीपल के पेड़ के पास घी का दीपक जलाना चाहिए। काले तिल, कंबल, तलवार, लोहे से बने चीजें दान कर सकते हैं। राहु के उपाय के लिए गोमेद रत्न पहन सकते हैं। अगर आपकी कुंडली में कालसर्प योग है तो चांदी का नाग बनवाकर उसकी विधि विधान से पूजा करके किसी मंदिर में दान कर दे।

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राहु को शांत करने के उपाय

अगर आपकी कुंडली में राहु नीच का है तो आपको प्रतिदिन भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाकर रुद्राभिषेक करते रहना चाहिए। भगवान शिव की तरह ही भगवान प्रभु श्री राम की भी आपको पूजा करनी चाहिए। भगवान शिव भगवान राम को अपना आराध्य मानते है। कभी भी किसी की खिलाफ झूठी गवाही ना दें न हीं झूठी कसमें खाये। आपको संधि काल सूर्योदय व सूर्यास्त के समय कोई भी विशेष काम नहीं करना लेकिन भगवान की पूजा आराधना कर सकते हैं। सोते समय अपने सिरहाने जौ रखकर सोना चाहिए और सुबह उसका दान देना चाहिए। प्रतिदिन सुबह-सुबह चिड़ियों को दाना भी डाल सकते हैं। राहु यंत्र अपने गले में लॉकेट के रूप में पहन सकते हैं। आप दाहिने हाथ में चांदी का कड़ा और गले में चांदी की चेन अवश्य धारण करें। आप किसी कुष्ठ रोगी को धन एवं खाने-पीने की चीजें दें। उसकी मदद करें। राहु से पीड़ित व्यक्ति को चांदी के सांप बनवाकर उन्हें बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए। राहु यंत्र की स्थापना करके उनकी विधि विधान से पूजा करनी चाहिए।

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