शमी वृक्ष की पूजा विधि

शमी वृक्ष की पूजा का क्या है खास महत्व? 

हमारी संस्कृति और हिंदू धर्म में तो प्रकृति पूजा का विशेष स्थान है और इसी कारण कुछ पेड पौधों का औषधीय महत्व होने के साथ साथ धार्मिक महत्व बहुत अधिक है ऐसा ही एक है “शमी का पौधा”  जिसकी पूजा का खास महत्व है।

शमी का पौधा ऐसे पेडो़ में शामिल है जिसका ज्योतिषशास्त्र में बड़ा महत्व है क्योंकि यह ग्रहों को प्रभावित करने वाला पेड़ माना गया है। हिदू धर्म ग्रंथों में प्रकृति को देवता कहा गया है। पंचभूतों में से एक धरती पर उगने वाले पेड पौधों में से कुछ औषधीय महत्व के तो होते ही है साथ ही हमारे ग्रह-नक्षत्रों के बुरे प्रभाव को कम करने के काम भी आते हैं। हमारे धर्म शास्त्रों में नवग्रहों से संबंधित पेड़-पौधों का जिक्र मिलता है, इन्हीं में से एक है शमी का पौधा

शमी का पौधा का संबंध सीधे शनि देव से है। नवग्रहों में “शनि महाराज” को दंडाधिकारी का स्थान प्राप्त है, इसलिए जब शनि की दशा या साढ़ेसाती आती है, तब मानव के अच्छे-बुरे कर्मों का पूरा हिसाब होता है इसलिए शनि के कोप से लोग भयभीत रहते हैं। पीपल और शमी दो ऐसे वृक्ष हैं, जिन पर शनि का प्रभाव होता है। पीपल का वृक्ष बहुत बड़ा होता है, इसलिए इसे घर में लगा नही सकते इसलिए हम इसकी जगह शमी का पौधा लगाते है। शनिवार की शाम को शमी के पौधे की पूजा की जाए और इसके नीचे सरसों तेल का दीपक जलाया जाए, तो शनि दोष से और उनके कुप्रभाव से बचाव होता है। शमी का पौधा एक चमत्कारिक पौधा भी माना जाता है, क्योंकि जो व्यक्ति इसे घर में रखकर इसकी पूजा करता है उसे कभी धन की कमी नहीं होती। शनि के दोषों को कम करना चाहते हैं तो हर शनिवार शनि को शमी के पत्ते चढ़ाना चाहिए। इस उपाय से शनि बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं और कार्यो की बाधाएं दूर हो सकती हैं। शमी का पौधा, तेजस्विता एवं दृढता का प्रतीक है। शमी का पौधा प्राकृतिक तौर पर अग्नितत्व की प्रचुरता होती है इसलिए इसे यज्ञ में अग्नि को प्रज्जवलित करने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

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शमी के पौधे पर कई देवताओं का वास होता है। सभी यज्ञों में शमी वृक्ष की समिधाओं का प्रयोग शुभ माना गया है। शमी के कांटों का प्रयोग तंत्र-मंत्र बाधा और नकारात्मक शक्तियों के नाश के लिए होता है । शमी के पंचांग (फूल, पत्ते, जड़ें, टहनियां और रस) का इस्तेमाल कर शनि संबंधी दोषों से जल्द मुक्ति पाई जा सकती है। इसे वह्निवृक्ष भी कहा जाता है। आयुर्वेद की दृष्टि में तो शमी का पौधा अत्यंत गुणकारी औषधी मानी गई है। कई रोगों में शमी का पौधा काम आता हैं। परिवार को रोग व्याधियों से बचाने में शमी के पौधे का महत्व बहुत अधिक है।

घर-परिवार, नौकरी या कारोबार की परेशानियां दूर करने के लिए गणपति की पूजा शुभ मानी जाती है। गणेशजी को भी दूर्वा के समान शमी पत्र भी प्रिय है गणेशजी को हर बुधवार शमी के पत्ते भी चढ़ा सकते हैं मान्यता है कि शमी के पौधे में शिव का वास होता है, इसी वजह से ये पत्ते गणेशजी को चढ़ाते हैं। शमी पत्र चढ़ाने से बुद्धि तेज होती है, घर की अशांति दूर होती है।

 

 
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