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पूजा करते समय मुहं किस दिशा में करें

घर में पूजाघर सबसे ख़ास स्थान होता है, जहाँ पर रोजाना सुबह-शाम हम भगवान को याद करते है। सनातन काल से कहा गया है की अगर घर में पूजाघर हो तो घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और मन शांत रहता है। आज भले ही हम 21वीं सदी में प्रवेश कर चुके है लेकिन हिन्दुओं ने फिर भी अपनी संस्कृति को बचा के रखा है।

आपको हर हिन्दू व्यक्ति के घर में मंदिर मिल जायेगा चाहे छोटा हो या बड़ा, लेकिन मंदिर जरुर होगा। खुद का घर हो या किराए पर हो लेकिन मंदिर हर घर में होता है और घर का एक व्यक्ति सुबह और शाम दोनों समय भगवान की आरती और पूजाकरता है। मंदिर सच में लोगों की आस्था और श्रदा का प्रतीक है।

सबसे ख़ास बात यह है की वास्तु में भी मंदिर को अहम जगह दी गई है। मंदिर का स्थान कहाँ होना चाहिए, किस दिशा में मुहं करके भगवान की पूजा करनी चाहिए आदि हर चीज वास्तु के हिसाब से निर्धारित है। आज की इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे की वास्तु के हिसाब से पूजाका सस्थान कहाँ होना चाहिए और पूजा करते समय मुहं किस दिशा में रखना चाहिए?



घर में पूजा का स्थान किस दिशा में होना चाहिए?

घर में पूजा का स्थान ईशान कोण यानी उतर-पूर्व दिशा में होना चाहिए क्योंकि ईशान कोण को वास्तु में सबसे शुभ माना जाता है। ईशान यानी ईश् औरईश् मतलब देवता अर्थात इस दिशा में देवताओं का वास होता है इसलिए मंदिर को इस दिशा में बनाना सबसे शुभ माना जाता है।भूलकर भी दक्षिण दिशा में पूजाघर ना बनायें क्योंकि यह दिशा भगवान यमराज की दिशा है और इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा आने लगती है।

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घर में किस-किस स्थान पर पूजाघर नहीं होना चाहिए?

  • सीढियों के नीचे कभी भी मंदिर नहीं बनवाना चाहिए।
  • शौचालय या बाथरूम के आसपास कभी भी मंदिर नहीं बनाना चाहिए अन्यथा भयंकर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
  • बेडरूम में मंदिर नहीं बनाना चाहिए।
  • बेसमेंट में भी पूजाघर नहीं बनाना चाहिए।

इन जगहों पर मंदिर बनाने से घर में कलेश होता है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। घर के मालिक का जीवन दुखदाई हो जाता है, इसलिए भूलकर भी इन जगहों पर पूजाघर नहीं बनाना चाहिए।




पूजा करते समय व्यक्ति का मुहं किस दिशा में होना चाहिए?

पूजा करते समय व्यक्ति का मुहं पूर्व या उतर दिशा में ही होना चाहिए। इस दिशा में मुहं करके पूजा करने से उतम फल मिलता है औरमनचाहा काम पूरा होता है।



पूजाघर से संबधित महत्वपूर्ण बातें

  • मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हमेशा शुभ-मुहूर्त में करनी चाहिए, क्योंकि मंदिर बनाना बहुत शुभ बात होती है और हर शुभ चीज की शुरुआत शुभ-मुहूर्त में करना अच्छा रहता है।
  • घर में 3 गणेश जी, 3 देवी प्रतिमा, 2 शिवलिंग, 2 शंख, 2 सूर्य प्रतिमा, 2 शालिग्राम का पूजन नहीं करना चाहिए अन्यथा इससे मानसिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
  • पूजा घर का रंग सफ़ेद होना वास्तु के हिसाब से शुभ माना जाता है।
  • पूजा स्थान का आकार चोकोर या गोल होना शुभ माना जाता है।
  • घर के मंदिर की उंचाई उसकी चौड़ाई से दुगुनी होनी चाहिए।
  • सोने के कमरे में मंदिर बनाना शुभ नहीं माना जाता है लेकिन अगर घर में जगह कम है और सोने के कमरे में ही मंदिर बनाना पड़े तो मंदिर के चारों और पर्दे लगा ले। ध्यान रखें की शयनकक्ष के उतर-पूर्व में ही मंदिर बनायें।
  • पूजाघर शौचालय के ठीक उपर और नीचे नहीं होना चाहिए।
  • रात के समय मंदिर के आगे पर्दे कर देने चाहिए।
  • वास्तु के अनुसार जिन देवी-देवताओं के हाथों में 2 से ज्यादा अस्त्र-शस्त्र है उनकी तस्वीर मंदिर में नहीं लगानी चाहिए।
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