east facing house vastu plan

कैसा हो आपका पूर्व मुखी घर वास्तु के अनुसार

घर किसी भी दिशा मे बनवाऐ पर वास्तु के अनुसार घर का नक्शा बनाना सबसे महत्त्वपूर्ण है क्योंकि जीवन के किसी भी प्रकार के एक पहलू में समस्या की वजह से दूसरी और समस्याओं को बढावा मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर परिवार में नियमित रूप से पैसे आ रहें है और परिवार आर्थिक रूप से मज़बूत है, लेकिन परिवार के सदस्यों में से हर व्यक्ति लगातार स्वास्थ्य संबंधी समस्योओं से जूझ रहा है तब कमाया हुए पैसा दवाओ पर खर्च हो जाएगा। इसका मतलब है कि अपने धन खर्च रोकने मे सक्षम नहीं है जो अप्रत्यक्षरूप से संपूर्ण हितस्वास्थ्य और खुशी को प्रभावित करता है। इसलिए हमेशा घर को वास्तु के अनुसार बनाने के लिए प्रयास करें। यदि आपने एक पूर्व मुखी भूमि को खरीदा है तो ये आपके लिए शुभ है। पूर्व दिशा को उत्तर के बाद सबसे शुभ दिशा के रूप में माना जाता है और इसलिए वास्तु अनुसार यह भूमि बहुत अच्छी मानी जाती है। यदि आप का झुकाव अध्यामिकता की ओर है और आप सोच रहे है कि कैसे अपने घर एवं उसके आस-पास सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ाया जाए तो पूर्व मुखी भूमि आपको यह विकल्प प्रदान करती है।

पूर्वमुखी घर और सकरात्मक ऊर्जा

सकारात्मक ऊर्जा ही किसी घर एवं व्यक्ति के जीवन में सुख एवं समृद्धि को लाती है। इस प्रकार वास्तुशास्त्र को चीनी फेंगशुई के समकक्ष समझा जा सकता है। वास्तु सिद्धान्तों का निर्माण विभिन्न प्रकार की अध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक विचारो के आधार पर किया गया है। उदाहरण के लिए एक पूर्व मुखी घर को अत्यन्त शुभ माना जाता है क्योंकि सूर्य जो कि प्रकाश और समृद्धि का प्रतीक है, पूर्व दिशा में उगता है और अपने साथ प्रकाश एवं सकारात्मक ऊर्जा को लाता है। इस प्रकार पूर्व मुखी घर अधिकतम सौर ऊर्जा का उपयोग करने में सक्षम होते है जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है। फिर भी यह आम धारणा कि पूर्व मुखी हमेशा शुभ ही होगा, पूर्णता सत्य नहीं है। घर के अन्दर कमरों की व्यवस्था, प्रवेश द्वार की स्थिति इत्यादि ये सभी कारक घर की शुभता का निर्धारण में अपना एक अलग महत्व रखते है अतः इन्हें भी वास्तुशास्त्र के नियम के अनुसार होना चाहिए।

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पूर्व दिशा मुखी घर बनाते वक्त इन बातो पर ध्यान दे

  • मकान के पूर्वी खण्ड को जितना सम्भव हो सके खुला रखना चाहिए जिससे कि अधिकतम सूर्य का प्रकाश घर में प्रवेश कर सके।
  • कोशिश करें कि घर के पूर्व दिशा के सामने कोई बड़ा पेड़ इत्यादि नहीं होना चाहिए क्योंकि यह सूर्य की रोशनी को बाधित करता है।
  • पूर्वी मुखी घर के उत्तर अथवा उत्तर-पूर्वी हिस्से में कभी भी कूड़ेदान या शौचालय स्थापित नहीं करें क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैं।
  • वास्तुशास्त्र के अंतर्गत घर के प्रवेश द्वार को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पूर्व मुखी घर में, मुख्य द्वार को पूर्व दीवार के मध्य से लेकर उत्तर पूर्वी हिस्से तक कही भी बनाया जा सकता है।
  • पूर्वमुखी घर मे उत्तर पूर्व दिशा पूजा घर एवं बैठक कक्ष के लिए आदर्श मानी जाती है क्योंकि सुबह यही पर सबसे पहले सूर्य की किरणें पड़ती है। अगर इस स्थान में एक भूमि-गत पानी की टंकी है तो यह उस घर के लिए शुभ माना जाता है।
  • एक पूर्व मुखी घर का निर्माण करते समय हमेशा यह ध्यान दे कि पूर्वी हिस्सा घर के अन्य स्थानों की तुलना में ऊँचा न हो।
  • वास्तुशास्त्र के अंतर्गत किसी भी घर में जिसका ढलान दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर है, अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन कुछ अपवाद जनक परिस्थितियों के अंतर्गत दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व दिशा की ओर ढलान भी स्वीकार है।
  • वास्तु के अंतर्गत पूर्वीमुखी घर मे दक्षिण पश्चिमी दिशा की तुलना में उत्तरी और पूर्वी दीवारों की ऊंचाई का कुछ कम होना अच्छा माना जाता है।
  • पूर्वमुखी घर मे गेस्ट रूम के लिए सबसे अच्छा स्थान उत्तर पश्चिम दिशा माना जाता है।
  • पूर्वमुखी घर मे मास्टर बेडरूम दक्षिण पश्चिम दिशा स्थापित किया जाना चाहिए।
  • पूर्वीमुखी घर मे रसोई घर के सर्वश्रेष्ठ स्थान दक्षिण पूर्व दिशा है विकल्प के रूप में इसे उत्तर पश्चिम दिशा में भी स्थापित किया जा सकता है। सीढ़ियां भी इसी दिशा में स्थापित की जा सकती है।
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उपर्युक्त वास्तु  के तरीकों को अपनाकर आप अपने पूर्व मुखी घर को बहुत ही शुभ बना सकते है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का अधिकतम प्रभाव आपके जीवन आ सके।  इस प्रकार इन वास्तुशास्त्र के नियम का पालन करके हम अपने घर और जीवन को खुशहाल बना सकते है।

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