वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का नक्शा

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का नक्शा कैसा होना चाहिए? (पूर्व मुखी)

वास्तु के बारे में आज के समय में हर कोई जानता है। कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो वास्तु के फायदे और नुकसान से परिचित नहीं है। इसलिए लोग घर बनाने से पहले वास्तु का पूरा ध्यान रखते है। कहाँ बाथरूम बनेगा, कितने रूम बनेंगे, क्या नक्शा रहेगा, कहाँ पूजा घर बनेगा, कहाँ रसोई बनेगी आदि हर एक चीज का ध्यान वास्तु के हिसाब से रखा जाता है।
कोई गलती ना हो इसलिए पहले से ज्योतिष को बुलाकर नक्शा तैयार करवाया जाता है क्योंकि घर बनाने के बाद तुडवाना असम्भव सा है और अगर वास्तु के हिसाब से घर नहीं बनाया जाता है तो बाद में समस्याएं आने लगती है। आज की इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे की वास्तु के अनुसार घर का नक्शा कैसा होना चाहिए?

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का नक्शा कैसा होना चाहिए?

वास्तु में कुल 9 दिशाएं होती है। 8 मुख्य दिशाएँ और उसके अलावा एक मध्य की दिशा तो इस तरह कुल 9 दिशाएं होती है। वास्तु में इस मध्य के स्थान को बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है क्योंकि यह व्यक्ति की जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। घर की दक्षिण दिशा का संबध करियर से होता है और दक्षिण-पश्चिम दिशा का संबध व्यक्ति की कुशलता और ज्ञान से होता है।
पश्चिम दिशा का संबध व्यक्ति के पारिवारिक संबधो से होता है। उतर दिशा का संबध सामाजिक सम्मान से जुड़ा होता है। उतर-पश्चिम दिशा धन और शान्ति से जुडी होती है। इसी तरह उतर-पूर्व की दिशा पति-पत्नी के मधुर संबधो और प्यार से जुडी होती है। घर की जो पूर्व दिशा होती है वो बच्चो से संबधित होती है। यह दिशा उनके विकास, सोच और हेल्थ को प्रभावित करती है।
घर का नक्शा इन दिशाओं के हिसाब से इस तरह बनायें

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1. घर का मुख्य द्वार

वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा में होना चाहिए। इससे घर में सुख-शांति का मार्ग खुलता है। भूलकर भी दक्षिण दिशा में घर का मुख्य द्वार ना बनवाएं इससे घर में मुश्किलें बढती है। घर के मुख्य द्वार पर किसी तरह का बिजली का खम्बा या पेड़ नहीं होना चाहिए। घर के सामने तिराहा या चौराहा नहीं होना चाहिए क्योंकि यह घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढाते है जो की घर के सदस्यों के लिए नुकसानदायक है।

2. घर में देवताओं की दिशा

घर के निर्माण के दौरान अग्नि, वायु और जल देवता का विशेष स्थान होता है। इनकी निर्धारित दिशाओं पर ही इनका स्थान होना चाहिए। अग्नि के स्थान पर अग्नि से संबधित कार्य ही होने चाहिए और जल के स्थान पर जल से संबधित कार्य। विपरीत दिशा में काम करने से नुकसान उठाना पड़ सकता है।

3. रसोई की सही दिशा

रसोई में अग्नि से संबधित सारे काम होते है इसलिए आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व की दिशा रसोई के लिए शुभ है।

4. पानी के टैंक का स्थान

घर में पानी का स्थान ईशान कोण होता है जो उतर-पूर्व दिशा में स्थिति होता है। ईशान कोण को वास्तु में सबसे शुभ माना जाता है।

5. पूजा घर

पूजा घर के लिए वास्तु में सबसे उचित स्थान ईशान कोण ही है। ईशान कोण देवताओं की दिशा है और देवता पूजा घर में ही विराजमान रहते है। इसलिए पूजा घर ईशान कोण यानी उतर-पूर्व दिशा में ही बनवाना चाहिए।

6. शौचालय की सही दिशा

वास्तु के अनुसार शौचालय नैऋत्य कोण में ही होना चाहिए। ध्यान रहे शौचालय के आसपास पूजा घर नहीं होना चाहिए अन्यथा भयंकर परिणाम भुगतने पड़ सकते है।

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अगर आपका घर पूर्व मुखी है तो ध्यान रखें इन बातों का भवन के पूर्व-उतर में खाली स्थान जरुर छोड़े जिससे धन, वंश और स्वास्थ्य लाभ मिलता रहे। जहां तक हो सके घर का पूर्व भाग नीचा रखें, इससे घ का स्वामी धन संपन्न रहेगा और उसका स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। अगर भवन में कोई किरायेदार रखना हो तो उस अवनत भाग में रखें और आप उन्नत भाग में रहे। कभी भी अवनत भाग को खाली ना छोड़े उस किसी ना किसी तरह काम में लेते रहे। पूर्व दिशा की चार दीवारी, पश्चिम दिशा की चार दीवारी से कम ऊँची होनी चाहिए। भवन के पूर्व भाग या ईशान कोण को अपवित्र ना रखें, ऐसा करने से धन और सन्तान हानि होती है।

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