वास्तु के अनुसार गौ मुखी प्लाॅट शुभ है या अशुभ

वास्तु के अनुसार गौ मुखी प्लाॅट शुभ है या अशुभ

गौमुखी प्लाॅट जैसा नाम से स्पष्ट है, गाय के मुख के आकार का होता है। इसमें सामने वाला हिस्सा आगे से कम चौड़ाई लिये होता है। पीछे जाते हुए काफी चौड़ा हो जाता है। यह आकार में गाय के मुख जैसा दिखाई देता है। गाय की तरह इस प्लाॅट को भी शुभ माना जाता है। कहते हैं कि यह प्लाॅट बहुत कल्याणकारी होता है। इसमें रहने वाला व्यक्ति सुखी, स्वस्थ व धनी होता है। उसकी संतान उसे सुख देने वाली होती है। पर क्या हर गौ मुखी प्लाॅट शुभ ही होते हैं। इसमें भी कुछ अपवाद हैं। विद्वान कहते हैं कुछ गौमुखी प्लाॅट अशुभ होते हैं। हम इस लेख में गौमुखी प्लाॅट के विषय में विस्तार से जानेंगें।

वास्तु के अनुसार गौमुखी प्लाॅट

गौमुखी प्लाॅट घर बनाने के लिए शुभ होते हैं। ऐसे घरों में रहने वाले लोग सुखी, व सम्पन्न होते हैं। उनके परिवार में आपसी मेल मिलाप व बरक्कत रहती है। ऐसे व्यक्ति धार्मिक व संस्कारी होते हैं। पर गौमुखी प्लाॅट व्यापार के दृष्टिकोण से अच्छे नहीं माने जाते। वहाॅ वस्तुओं का आवागमन नहीं होता। अर्थात वस्तुओं का क्रय विक्रय नही हो पाता। सिर्फ एक जगह संचय होता रहता है। जिसके कारण व्यापार में हानि होती है।

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पूर्व दिशा में बने गौमुखी प्लाॅट की स्थिति

पूर्व दिशा मैं बने गौमुखी प्लाॅट का वर्गाकार या आयताकार स्थिति में विश्लेषण करते हैं। इस स्थिति में इसका उत्तर दिशा की तरफ उत्तरी वायव्य कोण बढेगा। दक्षिण दिशा की ओर दक्षिणी नैऋत्य कोण बनेगा। वास्तु के अनुसार उत्तरी दिशा में वायव्य कोण का बढना शुभ परिणाम नही देता। इस कोण के बढने से परिवार में अशांति व क्लेष रहता है। दूसरी तरफ दक्षिणी नैऋत्य कोण भी अशुभ फल प्रदान करता है। परिवार के किसी व्यक्ति की अकाल मृत्यु होती है।
परिवार में बीमारियां व धनाभाव रहते हैं। वास्तु के अनुसार पूर्व गौ मुखी प्लाॅट को अशुभ मानते हैं।

पश्चिम दिशा में बने गौमुखी प्लाॅट का वास्तु

पश्चिम दिशा में बने गौमुखी प्लाॅट के पश्चिम की तरफ सड़क होती है। इस प्लाॅट का विश्लेषण वर्गाकार या आयताकार स्थिति में करते हैं। हम देखते है कि इस प्लाॅट के उत्तरी दिशा में उत्तरी ईशान कोण बढा हुआ है। और इस प्लाॅट के दक्षिण दिशा में दक्षिण अग्नि कोण बढा हुआ है। जिस प्लाॅट का उत्तरी ईशान कोण बढा हुआ हो तो उसे वास्तु के अनुसार अत्यंत शुभ माना जाता है। इस कोण के बढने से व्यक्ति को यश, मान, संतान सुख व असीम धन की प्राप्ति होती है।
इसी प्लाॅट में दूसरी ओर दक्षिण दिशा का अग्नि कोण भी बढ जायेगा। दक्षिण दिशा मैं बढा हुआ अग्नि कोण अशुभ होता है। इसके बढने से क्लेष, रोग व धनाभाव होता है। पश्चिमी गौमुखी प्लाॅट में जहाॅ उत्तरी ईशान कोण शुभ है वही दक्षिण अग्नि कोण अशुभ माना जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति संसय में पड़ जाता है कि प्लाॅट शुभ है या अशुभ।

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किस स्थिति में लाभदायक है पश्चिमी गौमुखी प्लाॅट

विशेषज्ञों के अनुसार जिस पश्चिमी गौमुखी प्लाॅट का उत्तरी ईशान कोण बड़ा हो वह प्लाॅट शुभ होता है। उत्तरी ईशान कोण दक्षिणी अग्नि कोण से बड़ा होगा तो अग्निकोण का दुष्प्रभाव नही होगा। उस व्यक्ति को उत्तरी ईशान कोण के सारे सकारात्मक प्रभाव मिलेंगे। वह व्यक्ति सुखी, सम्पन्न व निरोगी होगा। उसके घर में किसी भी चीज का अभाव नही होगा। परिवार के सभी सदस्यों में आपस में सामंजस्य रहेगा। व्यक्ति को समाज में मान सम्मान प्राप्त होगा।

किस स्थिति में हानिकारक है पश्चिमी गौमुखी प्लाॅट

अगर पश्चिमी गौमुख प्लाॅट का दक्षिण अग्नि कोण उत्तरी ईशानकोण से बड़ा है तो यह अशुभ माना जाता है। अर्थात उत्तरी ईशान कोण आकार में दक्षिण अग्नि कोणसे छोटा है तो यह सही नही है। जो व्यक्ति ऐसे घर में रहता है उसे प्रबल हानि होने की संभावना है। उसके घर में कलह, क्लेष रहता है। घर के अधिकांश सदस्य बीमार रहते हैं। पैसा घर में नही रूकता। संतान हानि, अकाल मृत्यु की संभावना रहती है। हमेशा पति पत्नी में झगड़े होते रहते हैं।

उत्तर दिशा में बने हुए गौमुखी प्लाॅट की स्थिति

उत्तर दिशा में बने हुए गौमुखी प्लाॅट को वर्गाकार या आयताकार स्थिति में देखते हैं। इस प्लाॅट के पूर्व दिशा की ओर पूर्वी अग्निकोण बढ जायेगा। इस प्लाॅट के पश्चिम दिशा की ओर पश्चिमी नैऋत्य कोण बढ जायेगा। वास्तु के अनुसार पूर्वी अग्निकोण का बढा होना
अशुभ होता है। ऐसे परिवार में संतान सुख मुश्किल से प्राप्त होता है। मानसिक तनाव व रोग लगे रहते हैं। दूसरी ओर पश्चिमी नैऋत्य कोण का बढना भी अशुभ संकेत देता है। परिवार के व्यक्ति व्यसनों, बुरी संगत में लिप्त होंगे। वे आलसी व फिजूल खर्च होंगे। वे धन का अपव्यय करेंगे। अतः उत्तरी गौ मुखी प्लाॅट वास्तु के अनुसार शुभ नही माना जाता।

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दक्षिण दिशा में बने हुए गौमुखी प्लाॅट की स्थिति

दक्षिण दिशा में बने हुए गौमुखी प्लाॅट का वर्गाकार या आयताकार विश्लेषण करते हैं। दक्षिणी गौमुखी प्लाॅट के पूर्वी दिशा की ओर पूर्वी ईशान कोण बनेगा। इस प्लाॅट के पश्चिम दिशा की ओर पश्चिमी वायव्य कोण बन जायेगा। पूर्वी ईशान कोण का बढना शुभ फल देता है। यह व्यक्ति को सम्मान, यश व धन प्रदान करने वाला होता है। दूसरी ओर पश्चिमी वायव्य कोण बढ जायेगा। इस कोण के बढने के कारण घर के सदस्य चंचल स्वभाव के होंगे। उन्हें अपमान, नुकसान व धनहानि हो सकती है। अब सोचने का विषय है कि यह प्लाॅट शुभ है या अशुभ।

किस स्थिति में लाभदायक है दक्षिणी गौमुखी प्लाॅट

वह प्लाॅट जिसका पूर्वी ईशान कोण बड़ा हो शुभ माना जाता है। अर्थात जहाॅ पूर्वी ईशान कोण पश्चिमी वायव्य कोण से बड़ा हो। इस तरह का प्लाॅट घर बनाने के लिए बहुत शुभ होता है।इस तरह का प्लाॅट आपको सुख, शान्ति व सौभाग्य प्रदान करने वाला होता है।

किस स्थिति में हानिकारक है दक्षिणी गौमुखी प्लाॅट

वह प्लाॅट जिसका पश्चिमी वायव्य कोण पूर्वी ईशान कोण से बड़ा हो अशुभ होता है। इस तरह का प्लाॅट दुख, दारिद्रय व बिमारी लेकर आता है। परिवार में मानसिक तनाव व असंतोष रहता है। ऐसे प्लाॅट में घर नही बनायें।
अगर बहुत आवश्यक है तो वास्तु शास्त्री से परामर्श अवश्य लें।

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