nazar lagna in hindi

क्या होते है बच्चों को नजर लगने के लक्षण जानिए बुरी नज़र से बचने के उपाय इन हिंदी

नजर लगने के लक्षण

हमारे समाज में नजर लगना और लगाना एक सामान्य बात है। हर परिवार में नजर लगने के उपाय जरुर किए जाते हैं। नजर बच्चे बूढे किसी को भी लग सकती है लेकिन इस बदलते समय में लोग इसे नहीं मानते है। घरेलू महिलाओं का ये मानना है कि बच्चों को नजर अधिक लगती है। यदि बच्चा दूध पीना बंद कर दे तो भी यही कहा जाता है कि भला चंगा था और अचानक नजर लग गई। माँ परेशान होकर तरह तरह के उपाय करती है।

क्या ये नजर बच्चों को ही लगती है?

ऐसा नहीं है कि नजर सिर्फ बच्चो को लगती है, यदि ऐसा होता तो फिर लोग ऐसा क्यों कहते हैं कि मेरे काम धंधे को नजर लग गई है। नया कपड़ा, जेवर आदि कट फट जाएं तो भी यही कहा जाता है कि किसी की नजर लग गई।

नजर कब लगती है?

जब कोई व्यक्ति अपने सामने के व्यक्ति अथवा उसकी किसी चीज को ईर्ष्या वश देखे या फिर देखता ही रह जाए तो उसकी नजर उस व्यक्ति या उसकी उस चीज को लग जाती है। ऐसी नजर बहुत खतरनाक होती है। ऐसी नजर उतारने के लिए विशेष प्रयत्न करना पड़ता है, नहीं तो नुकसान की आशंका ज्यादा हो जाती है।

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नजर किस की लग सकती है?

कई बार आपको अपनी ही नजर लग सकती है। ऐसा तब होता है जब कोई व्यक्ति अपने बारे में ही अच्छे या बुरे विचार मन में लाता है, बार बार दर्पण देखता है। उससे ईर्ष्या करने वाले लोगो की, उससे प्रेम करने वाले लोगों की तथा उसके साथ काम करने वाले लोगो की नजर भी लग सकती है किसी अनजान व्यक्ति, किसी जानवर या किसी पक्षी की नजर भी उसे लग सकती है। ऐसा भी कहा जाता है कि माँ की नजर बच्चे को जल्दी लगती है।

बुरी नजर लगना की पहचान क्या है?

नजर से प्रभावित व्यक्ति की निचली पलक फूल जाती है। बच्चो की पलक खड़ी हो जाती है। वास्तव में यही नजर की सही पहचान है किंतु इसकी सही पहचान कोई पारखी ही कर सकता है।

नजर दोष का वैज्ञानिक आधार क्या है?

नजर लगने पर कभी कभी हमारे रोमकूप बंद हो जाते हैं ऐसे में हमारा शरीर किसी भी बाहरी क्रिया को ग्रहण करने में स्वयं को असमर्थ पाता है। उसे हवा, सर्दी और गर्मी की अनुभूति नहीं हो पाती है। रोमकूपों के बंद होने के फलस्वरूप व्यक्ति के शरीर का भीतरी तापमान भीतर में ही समाहित रहता है। बाहरी वातावरण का उस पर प्रभाव नहीं पड़ता है। जिससे उसके शरीर में पांच तत्वों का संतुलन बिगड़ने लगता है। शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है। यही आयरन रोमकूपों से न निकलने के कारण आंखों से निकलने की चेष्टा करता है। जिसके फलस्वरूप आंखें की निचली पलक फूल या सूज जाती है। तब बंद रोमकूपों को खोलने के लिए अनेकानेक विधियों से उतारा किया जाता है।

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संसार की प्रत्येक वस्तु में आकर्षण शक्ति होती है. प्रत्येक वस्तु वातावरण से स्वयं कुछ न कुछ ग्रहण करती है। आमतौर पर नजर उतारने के लिए उन्हीं वस्तुओं का उपयोग किया जाता है।जिनकी ग्रहण करने की क्षमता तीव्र होती है।

नजर से बचने के लिए

आप इसे इस प्रकार भी आसानी से समझ सकते है कि किसी पात्र में सरसों का तेल भरकर उसे खुला छोड़ दें तो आप पाएंगें कि वातावरण के साफ व स्वच्छ होने के बावजूद उस तेल पर अनेक छोटे कण चिपक जाते हैं। ये कण तेल की आकर्षण शक्ति से प्रभावित होकर चिपकते हैं।

तेल की तरह ही नीबू, लाल मिर्च, कपूर, फिटकरी, मोर के पंख, बूंदी के लड्डू तथा ऐसी अन्य अनेक वस्तुओं की अपनी आकर्षण शक्ति होती है। जिनका प्रयोग नजर उतारने में किया जाता है। इस तरह उक्त तथ्य से स्पष्ट हो जाता है कि नजर का अपना वैज्ञानिक आधार है।

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