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कभी भी इस उंगुली में न पहनें कछुए की अंगूठी कछुआ अंगूठी की जानकारी

आपने ज्यादातर लोगों के हाथों में सोने की, चांदी की या हीरे की रिंग देखी होगी। लेकिन आज कल एक और तरह की रिंग लोगों के बीच प्रसिद्ध हो रही है। इसका नाम कछुआ रिंग है। आज कल बहुत सारे लोग इस रिंग को पहनते है। आइए इस अंगूठी के बारे में जानते है।

कछुआ अंगूठी की जानकारी

यह कोई आम अंगूठी नहीं है। वास्तु शास्त्र के अनुसार कछुआ रिंग बहुत शुभ है। यह अंगूठी मनुष्य के लिए लाभदायक भी है। इसकी वजह से मनुष्य के कई दोष शांत हो जाते है। कछुआ रिंग मनुष्य का आत्मविश्वास बढ़ाता है। यह इसका सबसे बड़ा फायदा है। कछुआ उन्नति का प्रतीक भी है। इससे विष्णु भगवान् का अवतार माना गया है। इसी कारण से इसे वास्तु शास्त्र में इतनी एहमियत दी गई है। कछुआ रिंग मनुष्य का धन भी बढ़ाता है।इन्ही फायदों की वजह से कछुआ रिंग प्रसिद्ध है।

कछुआ रिंग हमेशा चाँदी की होनी चाहिए। सोने से बनवाने के लिए भी कछुआ के आकर चाँदी का ही होना चाहिए। इसके बाद इसके ऊपर सोने से काम करवालें। कछुए का मुख हमेशा मनुष्य की तरफ रखें। गलत तरीके से पहनने से आपका धन कम हो जायेगा।

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पहली बार पहनते वक़्त रिंग को शुक्रवार के दिन ही पहने। शुक्रवार के ही दिन इसे खरीदें। पहनने से पहले इसको लक्ष्मी माता के सामने रखें। फिर इसको दूध और पानी से धो लीजिये। उसके बाद अगरबत्ती दिखा के पहन लीजिये। ऐसा करने से लक्ष्मी माता प्रसन्न होती है। पहनने के बाद यह रिंग घुमनी नहीं चाहिए। ऐसा करने से कछुए की दिशा बदलती है। यह सही नहीं होता।

कछुआ रिंग को किस ऊँगली में पहनना चाहिए ? इसे सीधे हाथ की मध्य या तर्जनी ऊँगली में पहने। आप कछुआ रिंग ऑनलाइन भी खरीद सकते है।आप कछुआ रिंग ज्योतिष से भी खरीद सकते है।

अभी तक आपने जाना की कछुआ रिंग क्या है। आइए अब जानते है कछुआ रिंग क्यों जरूरी है और इसके फायदें।

Kachua ring benefits in hindi

कछुआ रिंग पहनने के क्या फायदें है? आइए जानते है कछुआ रिंग के फायदें:

 

    • कछुआ रिंग आपका धन बढ़ाने में भी मदद कर सकता है।
    • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कछुआ रिंग घर में बरकत भी लेके आ सकती है ।
    • कछुए धरती और स्वर्ग दोनों से जुड़ा हुआ माना गया है। इसीलिए इसको पहनने से माहौल ख़ुशी भरा रहता है।
    • इस अंगूठी की वजह से परिवार वालों के बीच भी स्नेह बढ़ता है। उनके बीच झगडे भी नहीं होते।
    • यह अंगूठी पति-पत्नी और प्रेमी-प्रेमिकाओं के बीच में भी प्रेम बढ़ाने में मदद करता है।
    • कछुआ बहुत लम्बे समय जीवित रहता है। इसीलिए इस अंगूठी को पहनने से आपके सारे रोग दूर हो जाते है। इसी वजह से आप हमेशा स्वस्थ रहते है।
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  • इस रिंग की वजह से आपकी उम्र भी लम्बी होती है।
  • इसको पहनने से आपके मन में कोई भी बुरे ख्याल नहीं आते और नकारात्मक ऊर्जा भी दूर रहती है।
  • अंगूठी पहनने के बाद आप सफलता पाने के लिए ज्यादा प्रेरित रहते है।
  • इस अंगूठी को पहनने से आपके करियर में भी फायदा होता है। आपको आपके बिज़नेस या नौकरी में भी सफलता मिलती है।
  • कछुए की पीठ बड़े से बड़ा प्रहार सेह सकती है। यह अंगूठी मनुष्य के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। इसकी मदद से आप हमेशा सुरक्षित रहते है।

ध्यान रखें कछुआ रिंग के बारे में यह बातें

कछुआ रिंग बहुत सारे फायदें देता है। इस रिंग के सही इस्तेमाल से ही यह फायदें मिलते है। इस रिंग को पहनते वक़्त नीचे दी गई हुई बातों का अवश्य ध्यान दीजिये :

    • कछुआ रिंग हमेशा चांदी की बनी हुई होनी चाहिए।

 

    • इसे हमेशा शुक्रवार के दिन ही खरीदना चाहिए।
    • कछुआ रिंग हमेशा सीधे हाथ में पहननी चाहिए।
    • पहनने के बाद बार बार अंगूठी को घुमाना नहीं चाहिए।
    • मेष, कन्या, मीन और वृश्चिक राशि वाले लोगों को नहीं पहननी चाहिए। इन लोगों के लिए यह अंगूठी हानिकारक हो सकती है।
    •  कछुआ रिंग उतारकर मंदिर में ही रखें। वापिस पहनने से पहले लक्ष्मी माता की मूर्ति से छुआकर ही पहने।
    • महिलाओं को यह अंगूठी उलटे हाथ में पहननी चाहिए। पुरुषों को सीधे हाथ में पहननी चाहिए।

 

  • पूजा करके ही अंगूठी पहने।

कछुए की रिंग कुंभ राशि वाले वृष राशि वाले तुला राशि वाले मिथुन राशि वाले जातकों को पहननी चाहिए।

अगर आपके व्यापार में नुकसान हो रहा है तो आपको कछुआ रिंग पहननी चाहिए। अगर आपका आत्मविश्वास कम हो रहा है तो आपको कछुआ रिंग पहननी चाहिए। अगर आप आर्थिक समस्या से परेशान हैं तो आपको कछुआ रिंग पहननी चाहिए। अगर आपका स्वास्थ ठीक नहीं रहता है तो आपको कछुआ रिंग पहननी चाहिए। अगर आपके परिवार में कलह क्लेश रहता है तो आपको कछुआ रिंग पहननी चाहिए।

कछुआ रिंग को चांदी सोने या फिर अगर नहीं बनवा सकते तो अष्टधातु की रिंग में बनवा कर पहनना चाहिए। इस रिंग को पहनने से पहले इसे कच्चे दूध या दही में डालकर बृहस्पतिवार के दिन मां लक्ष्मी की प्रतिमा के आगे रखना चाहिए। शुक्रवार की सुबह पूजा के बाद पहनें। 


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