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वास्तु के अनुसार घर का नक्शा कैसा होना चाहिए ? – Vastu For House In Hindi

Vastu tips in hindi for house



घर के लिए वास्तु टिप्स

घर बनाते वक़्त वास्तु के नियमो का पालन करने से आप वास्तु के अनेक लाभ उठा सकते है। वास्तु शास्त्र घर बनाने के लिए ऐसे कई नियम बताता है जिसका पालन करने से आप एक सुखी जीवन बिता सकते है। वास्तु शास्त्र के अनुसार बनाया हुआ घर आपको वास्तु दोष का शिकार होने से भी बचाता है। घर बनाते वक़्त नियमो का पालन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।




घर बनाने के लिए वास्तु टिप्स - Vastu tips in hindi for home construction

निमिनलिखत कुछ नियमों का पालन करने से आप घर में खुशाली बनाये रख सकते है :



  • घर का निर्माण करने से पहले भूमि पूजन जरूर करवाना चाहिए। यह घर का निर्माण करने की एक शुभ शुरुआत मानी जाती है।
  • घर के मुख्य द्वार पर शुभ चिन्ह, जैसे की ॐ , स्वस्तिक का प्रयोग करना चाहिए। पूर्व या उत्तर दिशा आपके घर के मुख्य द्वार के लिए उचित मानी जाती है। काफी वास्तुशास्त्री यह भी मानते है की मुख्य द्वार 4 दिशाओं में से किसी भी एक दिशा में हो सकता है। यह 4 दिशाएं है – ईशान, उतर , वायव्य और पश्चिम।
  • घर बनाते वक़्त थोड़ी सी जगह घर के आँगन के लिए भी रखनी चाहिए। चाहे छोटा ही सही घर में आँगन होना चाहिए।
  • अगर घर बनाते वक़्त आप आँगन बनाते है तो उसमे सकारात्मक ऊर्जा पैदा करने वाले पौधें जरूर लगाएं। तुलसी, नीम , अमला जैसे पौधें सकारात्मक ऊर्जा पैदा करते है। तुलसी का पौधा हवा को शुद्ध करता है और घर मे रहने वाले लोगो को कई रोगो से दूर रखता है। । अनार का पौधा आप के आस पास के वातावरण को सकरात्मक बनाये रखने में मदद करता है। किसी भी प्रकार के रोग और शोक से मुक्त रहने के लिए नीम का पौधा काम आता है।
  • आमला को रोज़ खाने से एक फायदा मिलता है – यह आपके शरीर को समय से पहले बूढ़ा और कमज़ोर नहीं होने देता। इसीलिए घर बनाते वक़्त आमले का पौधा जरूर लगाएं।
  • घर बनाते वक़्त टॉयलेट और स्नानगृह अलग रखना चाहिए। यह दोनों जगहों के एक साथ होने से घर में कलेश हो सकता है।
  • घर के निर्माण के वक़्त स्नानगृह में नल की व्यवस्था उतर या पूर्व दिवार पर होनी चाहिए। बाथटब बनाते वक़्त यह जरूर ध्यान दे की नहाते वक़्त व्यक्ति के पैर दक्षिण दिशा में ना हो जाये।
  • घर बनाते वक़्त शौचालय की दिशा पे ध्यान देना जरूरी है। शौचालय के लिए पश्चिमी-दक्षिण और पश्चिम मध्य की दिशा सबसे उचित मानी गई है। इसके अलावा वायव्य कोण और दक्षिण दिशा के मधय भी उचित दिशाएं है।
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  • घर के निर्माण के वक़्त यह ध्यान रखे की आपके घर का स्नानगृह पूर्व दिशा में है। स्नानगृह में हाथ धोने के लिए वाशबेसिन हमेशा या तो उत्तरी दिवार या पूर्वी दिवार पर लगवाना चाहिए। दर्पण भी इन्ही किसी एक दिवार पे होना चाहिए। यह हमेशा ध्यान रखे की दर्पण कभी भी स्नानगृह के द्वार के सामने ना हो।
  • वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में नल से टपकते पानी को अच्छा नहीं माना गया है। इसीलिए घर बनाते वक़्त हमेशा ध्यान दे की आपके घर में पानी की निकासी हमेशा उतर या पूर्व दिशा से हो।
  • किसी भी घर में पूजा घर सबसे महत्वपूर्ण होता है। पूजा घर होने से घर मे सुख शांति बनी रहती है। इसीलिए घर बनाते वक़्त पूजा घर किस दिशा में बनाने है इसका निर्णय लेना जरूरी है। पूजा घर की दिशा घर मे रहने वाले लोगो की आयु पे भी असर करती है। इसीलिए यह आवश्यक है की पूजा घर सही दिशा में हो। ईशान कोण सबसे उचित जगह है घर मे पूजा घर बनाने की।
  • घर के पूजा घर मे वास्तु के अनुसार भगवन की मूर्तियां आमने सामने नहीं होनी चाहिए।
  • पूजा घर कभी भी घर के शयन कक्ष में नहीं होना चाहिए। उत्तर पूर्व दिशा ही सही दिशा है पूजा घर के लिए। इसीलिए इसे इसी दिशा में बनाना चाहिए।
  • घर बनाते वक़्त यह ध्यान रखे की आप पूजा घर की सीढ़ियों के नीचे ना बनवादें। यह जगह बिलकुल सही नहीं है पूजा घर के लिए।

Bedroom according to vastu shastra for home plan in hindi

vaastu for bedroom

बैडरूम के लिए वास्तु

शयन कक्ष घर की दूसरी महत्वपूर्ण जगह है। शयन कक्ष हमेशा सुकून भरा और शांति पूर्ण होना चाहिए। अगर घर बनाते वक़्त शयनक कक्ष की जगह सही नहीं है तो शयन कक्ष मे कभी भी नींद अच्छी नहीं आती। नीचे दिए गए कुछ नियमो का पालन करने से आप अपना शयन कक्ष शांति पूर्ण और सुखमय बना सकते है।

  • घर का मास्टर बैडरूम हमेशा दक्षिण पश्चिम या उत्तर पश्चिम दिशा मे होना चाहिए।
  • अगर आपके घर में उप्परि मंजिल है तो दक्षिण पश्चिम दिशा सबसे उचित है मास्टर बैडरूम के लिए।
  • जब आप सोये तो आपका सर दिवार से सटा हुआ होना चाहिए। सोते वक़्त यह जरूर ध्यान रखे की आपका पैर दक्षिण और पूर्व दिशा की तरफ ना हो।
  • अगर आप उत्तर दिशा की तरफ पैर करके सोते है तो आपको स्वास्थय और आर्थिक लाभ हो सकते है
  • सोते वक़्त पश्चिम दिशा की तरफ पैर रखने से शरीर की सारी थकान निकल जाती है और आपको अच्छी नींद आती है।
  • आप जिस बिस्तर पे सोते है उस बिस्तर के सामने शीशा नहीं लगाना चाहिए और ना ही बिस्तर शयनकक्ष के दरवाज़े के सामने होना चाहिए।
  • सोते वक़्त आपका सर दक्षिण या फिर पूर्व दिशा मे होना चाहिए।
  • शयन कक्ष की दीवारों को हमेशा हलके रंगो से ही रंगे।
  • हमेशा ध्यान रखे की आपके कमरे के दरवाज़ों से करकराहट की आवाज़ें नहीं आये।
  • वास्तु के अनुसार आपका पलंग लकड़ी का होना चाहिए और लोहे से बने हुए पलंग का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। लोहे से बने हुए पलंग सही नहीं होते।
  • शयनकक्ष मे फूलों और खुदकी तस्वीरें लगाने से कमरे मे प्यार भरा माहौल बना रहता है।
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Studyroom according to vastu shastra for home plan in hindi

study room vaastu

अध्ययन कक्ष वास्तु

पढ़ने का कमरा घर मे रेहने वाले बच्चों के लिए जरूरी होता है।घर बनाते वक़्त इस कमरे की दिशा पर भी ध्यान देना चाहिए। इस कमरे के निर्माण के कुछ नियम इस प्रकार है :

  • इस कमरे के लिए उचित दिशाए है पूर्व , उत्तर , ईशान और पश्चिम।
  • अध्यन करते वक़्त आपको हमेशा दक्षिण या पश्चिम दिवार से सटकर बैठना चाहिए।
  • अध्यन के टाइम आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए।
  • पढ़ते वक़्त भी आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा मे होना चाहिए। इसी के अनुसार अपने कमरे मे फर्नीचर एडजस्ट करे
  • आपके पीठ के पीछे दिवार हो सकती है दरवाज़ा नहीं।
  • किताबें रखने के लिए जो अलमारी बनवा रहे है वो दक्षिणी दिवार या पश्चिम दिवार पर होनी चाहिए।
  • हल्का हरा रंग, बादामी रंग, हल्का आसमानी रंग और सफ़ेद रंग इस कमरे के लिए उचित होते है।

Kitchen according to vastu shastra for home plan

kitchen vastu tips in hindi

सभी व्यक्तियों को जीवन व्यतीत करने के लिए भोजन की आवश्यकता जरूर होती है। इसी कारण से रसोईघर की दिशा भी बहुत जरूरी है घर के निर्माण के समय। अगर रसोईघर की दिशा सही नहीं होती तो घरवालों को भोजन के पाचन की बिमारियों से सामना करता पढ़ता है। वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार रसोई घर कुछ इस तरह बनाये:

  • आग्नेय कोण या दक्षिण पूर्वी दिशा सबसे उचित दिशा है रसोईघर के लिए।
  • इस दिशा के अलावा दूसरी उचित दिशा उत्तर पश्चिम दिशा है। इस दिशा मे भी आप रसोई घर बना सकते है।
    3. भोजन करते वक़्त आपका मुख उत्तर या पूर्व की तरफ होना चाहिए।
  • भोजन बनाते वक़्त भोजन बनाने वाले का मुख पूर्व दिशा मे होना चाहिए।
  • बर्तन और मसालें रखने की सबसे उचित दिशा पश्चिम दिशा है।
  • बिजली के उपकरण हमेशा दक्षिण पूर्व दिशा मे होने चाहिए।
  • झूठे बर्तन और खाना बनाने वाला चूल्हा दोनों अलग अलग स्लैब पे होने चाहिए।
  • हरा रंग, पीला रंग, गुलाबी रंग और क्रीम रंग उचित रंग है रसोईघर के लिए। काले रंग का उपयोग कभी भी नहीं करना चाहिए।
  • रसोईघर मे पीने का पानी रखने के लिए उत्तर पूर्व दिशा और गैस रखने के लिए दक्षिण पूर्व दिशा सबसे उचित है।
  • रसोई मे पूजा का स्थान नहीं बनाना चाहिए। अगर बहुत आवश्यक है रखना तो उत्तर पश्चिम दिशा ही सही है रखने के लिए।
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Drawing room according to vastu shastra for home plan

drawing room vaastu

ड्राइंग रूम वह जगह है जहाँ घर के सभी लोग बैठ के हस्सी ठिठोली करते है। घर मे आये हुए मेहमान का भी सत्कार इसी जगह पे होता है। इस कमरे की भी दिशा का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है । जानिए वास्तु के अनुसार घर का ड्राइंग रूम केसा होना चाहिए :

  • इस कमरे में फर्नीचर और कोई भी भारी वस्तु हमेशा दक्षिण पश्चिम दिशा मे रखनी चाहिए।
  • इस कक्ष मे बैठते वक़्त यह जरूर ध्यान दे की घर का मालिक का मुख हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए ।
  • अगर आप अपने ड्राइंग रूम को एक्वेरियम से सजाना चाहते है तो एक्वेरियम हमेशा उत्तर पूर्व कोण मे रखना चाहिए।
  • अगर आप ड्राइंग में टीवी रखना चाहते है तो टीवी को अग्नि कोण दिशा में रखे।
  • इस कमरे की दीवारों का रंग हरा , हल्का नीला , आसमानी रंग, पीला रंग या क्रीम रंग उचित माना गया है।

House construction tips in hindi

House construction tips in hindi

नीचे दिए गए वास्तु के कुछ सिद्धांत है जिनका घर बनाते वक़्त पालन करना चाहिए :

  • घर का मुख्या द्वार 4 मे से ही किसी एक दिशा में होना चाहिए। यह 4 दिशाएं है – ईशान , उत्तर , वायव्य और पश्चिम।
  • घर के आगे और पीछे दोनों तरफ आँगन बनाना चाहिए। इनमे से एक आँगन में तुलसी का पौधा भी लगाना चाहिए।
  • आपके घर के आस पास या एकदम सामने तिराहा या चौराहा नहीं होना चाहिए।
  • घर का दरवाज़ा बीच मे से खुलने वाला होना चाहिए। इसका मतलब यह है की दरवाज़ा 2 पल्लो से बना हुआ होना चाहिए।
  • घर के मुख्य दरवाज़े के दाएं तरफ तो शुभ और बाएं तरफ लाभ लिखना चाहिए।
  • घर मे जिस द्वार से आप प्रवेश करते है उसके उप्पर ॐ या स्वस्तिक का चिन्ह बनाना चाहिए।
    7. घर में भगवान् की अधिक तस्वीरें और मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए।
  • घर के सारे कोने और ब्रह्मस्थान हमेशा खाली रखना चाहिए।
  • अगर आपके घर के पास कोई मंदिर बना हुआ हो तो अच्छा है। इस से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती रहती है।
  • हो सके तो घर के ऊपर केसरिया रंग का ध्वज लगाके रखना चाहिए।
  • घर में टूटे फूटे बर्तन और कबाड़ इकठा ना करे। इस से घर में नकारात्मक ऊर्जा बनती है।
  • घर के छत पर और सीढ़ियों के नीचे भी कबाड़ इकठा ना करे।
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